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Sunday, 26 March 2017

विश्व गुरु की राह पे चलकर ....

पृथ्वी है ये अति विचित्र
महाद्वीप और महासमंदर
नदियां, फूल,पहाड़ और झील
कितना कुछ धरती के अंदर।

कितनी खोजें, इतना काम कर
जीवन बन सकता था सुंदर
फ़ैल गया घृणा का जहर
जब-तब होते महाबबण्डर।

इतने असुरक्षित हुए हैं ऊपर
रखवाली पानी के अंदर
कैसे - कैसे महाधुरन्दर
खाली हाथ ही गया सिकन्दर।

अब तो जीना सीख लो चन्दर
योगी जी की गोद में बन्दर।
विश्व गुरु की राह पे चलकर
बन जाओ हर प्रश्न का उत्तर।

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